
ठियोगक्षेत्र ग्राम देवी देवताओं की धरती मानी जाती है। यहां हर परगने या क्षेत्र का अपना देवता या देवी है जिसके अपने अपने मानने वाले हैं जिन्हें कलैणे कहा जाता है। पिछले कुछ सालों से ठियोग की पुरानी जर्जर हो चुकी देवी देवताओं के मंदिरों के स्थान पर कलैणे नए भव्य मंदिर बना रहे हैं। ठियोग के कई प्रसिद्ध देवी देवताओं के मंदिरों का पुर्ननिर्माण हो चुका है। इसी कड़ी में जैस पंचायत के गजैड़ी गांव के देवता महासू के प्राचीन मंदिर के स्थान पर नए भव्य मंदिर का निर्माण पिछले चार सालों से चल रहा है। महासू देवता का मूल स्थल हनोल उत्तराखंड हैं और गजेड़ी में इस देवता के सैंकड़ों कलैणे रहते हैं। यह देवता ठियोग रियासत के परिवार का देवता माना जाता है। जशैईक खानदान इस देवता को मानता है। कई सौ साल पुराने जर्जर हो चुके मंदिर के स्थान पर बन रहे इस मंदिर के निर्माण के लिए मंडी के जंजैहली क्षेत्र से कारीगर बुलाए हैं। 15 के आसपास कारीगर लगातार चार सालों से इस भव्य मंदिर के निर्माण में लगे हुए हैं। ठियोग क्षेत्र के अन्य देव मंदिरों की शैली से कुछ भिन्न इस मंदिर की हर मंजिल में...
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^पूरी खबर पढ़े: source - Dainik Bhaskar
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