Monday, July 1, 2013

रेशम से तैयार होंगे शाल-मफलर!


बिलासपुर — अब रेशम व्यवसाय से जुड़े किसान रेशम धागे से शाल और मफलर व अन्य उत्पाद तैयार करेंगे। यह कार्य खड्डियों के माध्यम से होगा और इसके लिए किसानों को ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित कर बाकायदा ट्रेंड भी किया जाएगा। हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम की ओर से साठ लाख रुपए का महत्त्वपूर्ण प्लान स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजा गया है। प्लान को ग्रीन सिग्नल मिलने पर किसानों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू होगा। जानकारी के मुताबिक हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम ने रेशम उत्पादकों को हस्तशिल्प बाजार से जोड़ने की योजना तैयार की है। चूंकि पूरे प्रदेश में केवल बिलासपुर जिला में सर्वाधिक कोकून उत्पादन होता है और यहां साल दर साल रेशमपालकों के आंकड़े में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, लिहाजा इस योजना का श्रीगणेश बिलासपुर जिला से किया जा रहा है। केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद जिला में इस योजना को क्रियान्वित किया जाएगा। इसमें रेशमपालकों को रेशम धागे से शाल व मफलर तथा अन्य उत्पाद तैयार करने के साथ ही डिजाइन डिवेलपमेंट को लेकर भी ट्रेंड किया जाएगा। ट्रेनिंग प्रोग्राम ब्लॉकवार चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाएंगे। ट्रेंड होने के बाद रेशम उत्पादकों को समूहों में विभाजित कर निगम द्वारा संचालित की जा रही खड्डियों के साथ जोड़ा जाएगा। अहम बात यह है कि खड्डियों में विभिन्न प्रकार की शाल और मफलर के अलावा अन्य उत्पाद तैयार करने के लिए खुद निगम ही रॉ मैटीरियल उपलब्ध करवाएगा। यही नहीं, मैटीरियल तैयार होने पर इसकी मार्केट की भी व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के सिरे चढ़ने से रेशम उत्पादकों को न केवल घर बैठे रोजगार मिलेगा, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। उधर, इस बारे में हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के प्रबंध निदेशक ललित मोहन ने बताया कि बिलासपुर के लिए साठ लाख रुपए की योजना मंजूरी के लिए केंद्र को भेजी गई है। हरी झंडी मिलने के बाद रेशम उत्पादकों को ट्रेनिंग प्रदान कर खड्डियों से जोड़ा जाएगा।







source: DivyaHimachal

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