Friday, June 28, 2013

नाथपा-झाकड़ी प्रोजेक्ट ठप


रामपुर बुशहर — भारी बारिश ने एक बार फिर से 1500 मेगावाट की नाथपा-झाकड़ी परियोजना की दिक्कतों को बढ़ा दिया है। ऊपरी क्षेत्रों मे रही वर्षा के कारण सतलुज नदी में सिल्ट की मात्रा काफी अधिक बढ़ गई है, जिस कारण गुरुवार सुबह करीब नौ बजे परियोजना में विद्युत उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया। जानकारी अनुसार गुरुवार सुबह सतलुज नदी में सिल्ट मात्रा अचानक 12 हजार पीपीएम तक पहुंच गई, जबकि बांध में नदी का जलस्तर भी 1500 क्यूमैक्स दर्ज किया गया। इतनी अधिक सिल्ट व पानी के चलते परियोजना में विद्युत निर्माण करना असंभव है, जिसके चलते गुरुवार सुबह परियोजना प्रबंधन ने नाथपा डेम के फाटक खोल दिए, जिसके चलते झाकड़ी परियोजना की सभी छह टरबाइनों को बंद करना पड़ा। झाकड़ी परियोजना में उत्पादन बंद होने के कारण रोजाना एसजेवीएन को नौ करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है। फिलहाल सिल्ट की मात्रा 12 हजार पीपीएम पार कर चुकी है तथा अभी यह मात्रा और ज्यादा बढ़ सकती है, जिससे एक-दो दिनों में उत्पादन की संभावना काफी कम है, क्योंकि इससे टरबाइनों को क्षति पहुंच सकती है। गौर रहे कि इस माह तीसरी बार सिल्ट के कारण परियोजना को बंद करना पड़ा है। एक सप्ताह पूर्व बीते रविवार को भी सतलुज नदी में सिल्ट करीब आठ हजार पीपीएम तक पहुंच गई थी, जिस कारण इस परियोजना को बंद करना पड़ा था और परियोजना को खासा नुकसान उठाना पड़ा था। सिल्ट के कारण तीन दिनों बाद इस परियोजना को फिर से चालू किया गया था, लेकिन अब एक सप्ताह बाद फिर से इतनी ज्यादा बढ़ी सिल्ट की मात्रा ने परियोजना प्रबंधन की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। उत्तरी राज्यों में बिजली की कमी के कारण नार्दन ग्रिड पर उत्पादन का पहले ही दबाव है, ऐसे में उत्तरी राज्यों की औद्योगिक इकाइयों पर इसका असर पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को भी बिजली से मुश्किलें होंगी। विदित रहे कि नाथपा झाकड़ी परियोजना से जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के अलावा चंडीगढ़ व दिल्ली को सप्लाई दी जाती है। परियोजना के बंद रहने से परियोजना को हर दिन नौ करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।







source: DivyaHimachal

Full Story at: http://www.divyahimachal.com/himachal/shimla-news/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%a0/

No comments:

Post a Comment