शिमला — भूकंपरोधी तकनीक व बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा बल के 1100 जवान हिमाचल के गृहरक्षकों व पुलिस जवानों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इसका मकसद इन दोनों ही विभागों के जवानों का क्षमता निर्माण करना होगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ कंसल्टेंट ब्रिगेडियर खन्ना ने शिमला में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि यदि स्कूलों, अन्य प्रशिक्षण संस्थानों व हर घर के लोगों में इस बाबत जागरूकता लाई जाए तो यह अभियान सफलता की और बढ़ सकता है। इस दौरान पूर्वाेत्तर राज्यों में आपदा प्रबंधन के लिए तैनात विशेष अधिकारी श्रीवास्तव भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि कागजी कार्रवाई से किसी भी तरह का हल नहीं निकलने वाला है। जब तक हर आदमी को जागरूक नहीं किया जाता है। इसके लिए वास्तव में सक्रिय गैर सरकारी संगठनों, स्कूली छात्रों, हर मोहल्ले में गठित की गई समितियों का सहयोग जहां आवश्यक है, वहीं उन्हें ऐसे कार्यों के लिए तैयार करने की भी बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वह हिमाचल के पुलिस महानिदेशक से भी बैठक करने जा रहे हैं, ताकि हर पुलिस के जवान को ऐसे कार्य के लिए तैयार किया जा सके, क्योंकि यही जवान वास्तव में बचाव कार्यों को अंजाम देने में सक्षम होते हैं। ब्रिगेडियर खन्ना के मुताबिक जो सर्वेक्षण किए गए हैं, उसके तहत सबसे पहले अस्पतालों, महत्त्वपूर्ण विभागों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी आवश्यक है, क्योंकि किसी भी ऐसी घटना के दौरान ऐसे ही सरकारी अदारों से नियंत्रण व संचार संबंधी गतिविधियां संचालित होती हैं। इस दौरान शिमला के उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा ने एक सवाल पर बताया कि आपदा प्रबंधन के लिए चार करोड़ रुपए की राशि राज्य योजना में रखी गई है। हर जिला को 11 से 15 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे आवश्यक साजो-सामान की खरीद की गई है।
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