Wednesday, February 13, 2013

हाउस लोन से पहले एनओसी


शिमला— हिमाचल ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में अब भवन निर्माण से पहले लिए जाने वाले हाउस लोन के लिए किसी भी धारक को अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक होगा। इससे पहले उसे हाउस लोन मंजूर नहीं होगा। यदि ऐसी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं तो धारक को आयकर में भी छूट का प्रावधान हो सकता है। ‘दिव्य हिमाचल’ से बातचीत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ कंसल्टेंट ब्रिगेडियर खन्ना ने बताया कि उन्होंने पहाड़ी राज्यों में भूकंप की संवेदनशीलता को भांपते हुए यह सिफारिश भारतीय रिजर्व बैंक को भेज दी है। संभवतः इस पर अमल होते ही संबंधित प्रदेशों में जागरूकता तो बढ़ेगी ही, अनचाहे निर्माण पर भी अंकुश लग सकता है। मसलन इस सिफारिश के अंतर्गत भवन निर्माता को भवन निर्माण के लिए तय राष्ट्रीय कोड की अनुपालना आवश्यक होगी, जिसमें भूकंपरोधी तकनीक के इस्तेमाल के मानक निर्धारित किए गए हैं। अभी तक कहने को पहाड़ी राज्यों में भूकंपरोधी तकनीक का निर्माण भवन निर्माण के दौरान करने की औपचारिकता निभा दी जाती है, मगर असल में तकनीक महंगी होने के कारण उस पर सही तरीके से अमल नहीं किया जाता। यही वजह है कि पूर्वोत्तर राज्यों में रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता जब भी बढ़ी तो उत्पात ही मचा। गुजरात के भुज में आए भूकंप के बाद प्राधिकरण ने ऐसे मानकों पर तेजी से कार्य किया है। ब्रिगेडियर खन्ना ने बताया कि आईआईटी मद्रास व मुंबई के विशेषज्ञों ने हिमाचल में शिमला, चंबा, मंडी, नाहन, बिलासपुर, हमीरपुर, कुल्लू और ऊना में तकनीकी सर्वेक्षण किया है। इसके अंतर्गत जोखिमपूर्ण इमारतों का उल्लेख किया गया है। जिलों, ब्लॉकों व विभागीय स्तर पर तो काम हो ही रहा है। राष्ट्रीय प्राधिकरण ने ट्राईसिटी मेगा मॉकड्रिल के तहत 13 फरवरी को शिमला में मॉकड्रिल करने का ऐलान किया है।







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