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Friday, December 6, 2019

सरकार में निहित होगी टॉप ब्यूरोक्रेट की 16 बिस्वा जमीन

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे आईएएस के शिमला में खरीदे भूखंड पर नहीं बना स्ट्रक्चर

शिमला-हिमाचल काडर के एक टॉप ब्यूरोक्रेट की जमीन सरकार में निहित होगी। शिमला के बल्देयां (मशोबरा) में 16 बिस्वा के भूखंड को सरकार ने अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। धारा-118 के तहत वर्ष 2005 में महिला आईएएस अधिकारी ने यह जमीन निजी मकान बनाने के उद्देश्य से खरीदी थी। नियमों के तहत महिला अधिकारी को दो वर्ष के भीतर इस जमीन पर भवन निर्माण करना जरूरी था। बावजूद इसके महिला अधिकारी ने अब तक इस भूमि पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है। इस कारण राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारी के भूखंड को सरकार में निहित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। रोचक है कि भूखंड को खरीदने के दो साल बाद महिला आईएएस अधिकारी ने इसे बेचने का सरकार को आवेदन कर दिया। वर्ष 2007 के दौरान किए गए आवेदन में कहा कि उनके भूखंड के आसपास की जमीन की कटिंग होने से रास्ता बंद हो गया। इस कारण उनके भू-खंड तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। इसका हवाला देते हुए आईएएस अधिकारी ने अपनी 16 बिस्वा जमीन पालमपुर के कृषक को बेचने की सरकार से अनुमति मांगी। करीब एक दशक तक लटके रहे इस मामले में 10 साल बाद सरकार ने महिला अधिकारी को राहत दे दी। इस आधार पर दो नवंबर 2017 को डीसी शिमला से इस जमीन को बेचने की सिफारिश करते हुए मामला सरकार को भेज दिया।  बावजूद इसके सरकार से जमीन बेचने की अनुमति नहीं मिली। खास है कि 20 जून, 2019 को महिला अधिकारी ने दोबारा इस जमीन को बेचने के लिए आवेदन कर दिया। हर बार की तरह सरकार ने स्पष्ट किया कि नियमों में इस तरह के मामले में जमीन को बेचने का कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा सरकार ने यह मामला खारिज करते हुए 26 सितंबर, 2019 को डीसी शिमला को नियमों के तहत कार्रवाई के लिए भेज दिया है। इसके तहत इस जमीन को सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। चूंकि पांच मार्च, 2019 को संबंधित पटवारी ने इस भूखंड को लेकर अपने रोजनामचा रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया था कि मकान बनाने के लिए खरीदी गई 16 बिस्वा जमीन का प्रयोग नहीं हुआ है।

उपायुक्त कार्यालय मेहरबान

पटवारी की नेगेटिव रिपोर्ट के बावजूद डीसी ऑफिस शिमला से दोबारा यह केस सरकार को प्रेषित कर दिया गया। इस बार चौंकाने वाली रिपोर्ट करते हुए जिला राजस्व विभाग ने कहा कि इस भूखंड पर चार बाई चार का इंटो का स्ट्रक्चर बना है। लिहाजा इस भूखंड को अन्य व्यक्ति को बेचने की सरकार से सिफारिश की गई।

सरकार की फिर फटकार डीसी ऑफिस की रिपोर्ट पर फटकार लगाते हुए राज्य सरकार ने इस मामले में तीखी टिप्पणी की है। इसमें कहा गया कि नियमों की परिपाटी में इस जमीन को नहीं बेचा जा सकता। इस कारण उपायुक्त कार्यालय नियमों के तहत इस जमीन को लेकर उचित कार्रवाई आरंभ करें।

यह है अड़चन

महिला अधिकारी ने इस भूखंड का प्रयोग 14 साल तक नहीं किया। रोजनामचे में दर्ज रिपोर्ट से हुए इस खुलासे के कारण इस भूखंड का अब सरकार में निहित होना तय है। बावजूद इसके कुछ राजस्व अधिकारी मिलीभगत से इस केस को सेटल करने में लगे हैं। यही कारण है कि इस भूखंड को बेचने के लिए बार-बार राजस्व विभाग सिफारिश कर रहा है।

क्या है नियम

धारा-118 के तहत गैर कृषक हिमाचली राज्य सरकार की अनुमति से जमीन खरीद सकता है। इस जमीन का प्रयोग दो साल के भीतर करना अनिवार्य है। यकायक विकट परिस्थितियां उत्पन्न होने पर जमीन के प्रयोग के लिए एक साल अतिरिक्त समय दिया जाने का सरकार को अधिकार है।

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Courtsey: Divya Himachal

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