राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा बोलीं, महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत
शिमला —महिलाआें की मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती के लिए हर क्षेत्र में मानसिक परामर्शदाताओं का होना जरूरी है, जिसके लिए संस्थाआें को आगे आना चाहिए। शिमला के घंडल स्थान पर आयोजित कार्यशाला में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ये निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए विभिन्न स्तरों व संस्थाओं के अंतर्गत मानसिक परामर्शदाताओं का होना आवश्यक है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न शैक्षणिक व अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों से इस संबंध में कार्य करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और शारीरिक विकास विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य महिला आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में न्यायिक अकादमी घंडल के सभागार में यह कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि महावारी प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसके संबंध में समाज को पुरानी कुरितियां त्याग देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार की समृद्धि व खुशहाली महिलाओं पर निर्भर करती है। उन्होंने महिलाओं के मानसिक स्वस्थता के प्रति भी विशेष ध्यान देने की अपील की। सहायक निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग डा. सीमा ठाकुर ने तृतीय तकनीकी सत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य में पोषण के महत्त्व पर जानकारी दी। इस अवसर पर गुजरात राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ललिना बेन, झारखंड महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण, हरियाणा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष प्रीति भारद्वाज, सदस्य रेणु भाटिया तथा सदस्य झारखंड महिला आयोग शर्मिला सोरन, उपनिदेशक पंजाब महिला आयोग विजय कुमार, सदस्य राज्य महिला आयोग मंजरी नेगी इंदु बाला, निदेशक न्यायिक अकादमी घंडल वीरेंद्र शर्मा, निदेशक महिला एवं बाल विकास राजेश शर्मा भी उपस्थित थे।
योजनाओं पर जानकारी
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सम्मान, संरक्षण, स्वास्थ्य व सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में जानकारी दी। अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग निशा सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाआें तथा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों व प्रयासों के संबंध में जानकारी दी।
महिलाओं की मेंटल कंडीशन पर भी चर्चा
प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता आईपीएस कमांडेंट फर्स्ट बटालियन जुन्गा अंजुम आरा तथा डा. सुषमा रेवाल ने की, जिसमें संध्या महाविद्यालय शिमला की प्रधानाचार्य मीनाक्षी फेथपाल ने महिला सशक्तिकरण में महिलाओं के मानसिक व भावनात्मक स्थिति पर विचार प्रकट किए। द्वितीय तकनीकी सत्र में डा. अंजलि चैहान ने माहवारी के दौरान स्वच्छता, वर्तमान परिदृश्य, प्रभाव और चुनौतियों तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा इस संबंध में सामाजिक वर्जनाआें के प्रति जागरूकता प्रदान किए जा रहे कार्यों पर विचार रखे, जिसकी अध्यक्षता मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. भीषण धीमान ने की।
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