शिमला— करीब सात महीने बाद हिमाचल में बहार लौट आई है। बिजली के लिए तरस रहे प्रदेश के पास अब कोई कमी नहीं है। हिमाचल में उत्पादित बिजली की बिक्री शुरू हो गई है, क्योंकि प्रदेश के पास 107 लाख यूनिट रोजाना सरप्लस हैं। इससे प्रदेश बिजली बोर्ड ने भी राहत की सांस ली है। हालांकि बेची जा रही बिजली का मूल्य अधिक नहीं मिल पा रहा है, मगर बिक्री शुरू हो चुकी है। पहाड़ी राज्य ने सर्दियों में पड़ोसी राज्यों से ली गई बिजली की वापसी भी चालू कर दी है। पहले चरण में दिल्ली और पंजाब राज्यों को बैंकिंग की बिजली लौटाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके बाद हरियाणा और उत्तर प्रदेश को बिजली की सप्लाई शुरू होगी। बिजली बोर्ड के पास कुल 352 लाख यूनिट बिजली रोजाना उपलब्ध है। 80 लाख यूनिट बोर्ड के पावर हाउसेज में उत्पादित हो रही है। 50 लाख यूनिट बसपा प्रोजेक्ट से मिल रहे हैं और 35 लाख यूनिट छोटी निजी परियोजनाआें से। 24 लाख यूनिट बिजली केंद्रीय परियोजनाआें के शेयर के रूप में प्राप्त हो रही है, वहीं शेष बिजली सरकारी हिस्से की है। प्रदेश की खुद की बिजली जरूरत इस समय 245 लाख यूनिट रोजाना है, जबकि उपलब्धता 352 लाख यूनिट की है। सरप्लस होने के बाद प्रदेश ने बैंकिंग की बिजली वापस करना शुरू कर दिया है। पंजाब को रोजाना 36 लाख यूनिट बिजली की सप्लाई की जा रही है, वहीं दिल्ली राज्य को 10 लाख यूनिट रोजाना भेजी जा रही है। इसके अलावा सरप्लस से शेष बची बिजली को हिमाचल नॉर्थ ग्रिड के माध्यम से बेच रहा है। मार्केट में बिजली का रेट काफी कम मिल रहा है। पहले जो रेट तीन रुपए से ज्यादा होता था, वह वर्तमान में 2.60 रुपए प्रति यूनिट चल रहा है।
from Divya Himachal
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