बिलासपुर — आधुनिकता की चकाचौंध में लुप्त हो रही पौराणिक दुर्लभ वस्तुएं बिलासपुर में बन रहे हिमाचल के पांचवें संग्रहालय की शोभा बढाएंगी। प्राचीन वस्तुओं व पांडुलिपियों के साथ ही मूर्तियों की खोजबीन के लिए भाषा एवं संस्कृति विभाग ने गांव-गांव अभियान शुरू कर दिया है। अभी तक महकमे ने इस अभियान में सौ के करीब प्राचीन दुर्लभ वस्तुएं भी जुटा ली हैं। जानकारी के अनुसार बिलासपुर शहर में करीब दो करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन भाषा एवं संस्कृति विभाग के भवन का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। हालांकि थोड़ा बहुत कार्य शेष बचा है, जिसे विभाग ने जल्द से जल्द पूरा करवाने के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि भवन का निर्माण कार्य पूरा होते ही गतिविधियों के संचालन के मद्देनजर इसका उद्घाटन भी करवा दिया जाएगा। अहम यह है कि इस भवन में संग्रहालय बनेगा, जिसमें प्राचीन दुर्लभ वस्तुओं को रखा जाएगा। इन वस्तुओं को जुटाने के लिए विभाग ने गांव-गांव अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत लोगों से पुरानी दुर्लभ वस्तुएं एकत्रित की जा रही हैं, जिन्हें संग्रहालय में संग्रहीत किया जाएगा। राजाओं के जमाने की वस्तुओं के अलावा पांडुलिपियां और पुराने जमाने में बुजुर्गों द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं को एकत्रित किया जा रहा है। आधुनिकता की चकाचौंध में लुप्त हो रही पुरानी वस्तुओं को संग्रहालय में संजोया जाएगा। उधर, इस बारे में बात करने पर जिला भाषा अधिकारी डा. अनिता शमार् ने बताया कि गांव-गांव अभियान में लोगों से प्राचीन दुर्लभ वस्तुओं के साथ ही पांडुलिपियां व अन्य वस्तुएं ली जा रही हैं। ये वस्तुएं संग्रहालय की शोभा बढ़ाएंगी।
source: DivyaHimachal
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