शिमला – एयर पॉल्यूशन की चपेट में आए राज्य के सात शहरों की रिपोर्ट पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल सरकार को चेतावनी जारी की है। इन शहरों की स्टडी रिपोर्ट पर एनजीटी ने अपने पारित आदेशों में राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने को कहा है। इसके अलावा उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के सात शहरों पांवटा, कालाअंब, बद्दी, नालागढ़, परवाणू, सुंदरनगर और डमटाल में हवा बेहद खतरनाक तरीके से दूषित हो चुकी हैं। इन शहरों में सांस लेना मुश्किल हो गया है। एक अन्य सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 फीसदी हार्ट अटैक के मामले दूषित हवा से होते हैं। उक्त सात शहरों में जनजीवन खतरे में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सातों शहरों में 2.5 पर्टिकुलेट मैटर की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है। सामान्य जीवन के लिए इसकी संख्या चार से कम होनी चाहिए। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार इन शहरों में पर्टिकुलेटर मैटर की संख्या 10 तक पहुंच गई है। इसके अलावा एयर 100 माइक्रोग्राम के आसपास होनी चाहिए। बावजूद इसके इसकी वृद्धि 180 से 220 तक दर्ज हो गई है। इस कारण इन शहरों में जनजीवन खतरे में है। लिहाजा एनजीटी ने अपने पारित आदेशों में कहा है कि राज्य सरकार इसके लिए ठोस कदम उठाए। सरकार को बड़े से बड़ा फैसला लेकर इन शहरों को प्रदूषण से बचाना होगा। उल्लेखनीय है कि जयराम सरकार ने इन शहरों को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए ‘पापा’ प्रोजेक्ट आरंभ किया है। इसके तहत पांवटा, कालाअंब, बद्दी, नालागढ़, परवाणू, सुंदरनगर और डमटाल में प्लांटेशन के माध्यम से जहरीली हवा को नष्ट किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश सरकार ने सातों शहरों में चार लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस कड़ी में दो लाख के करीब प्लांटेशन की गई है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस पौधारोपण के बाद दूषित हवा को समाप्त कर शुद्ध आबोहवा पैदा होगी।
उच्च स्तरीय समिति बनेगी
एनजीटी के आदेशों पर प्रदेश सरकार पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर रही है। इसमें उद्योग, शहरी विकास और पर्यावरण विभाग के निदेशकों को बतौर सदस्य शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव को कमेटी का सदस्य सचिव बनाया जाएगा। कमेटी सातों शहर बचाने के लिए अपनी सिफारिशें देगी।
यह है प्रदूषण की वजह
रिपोर्ट के अनुसार कच्चे मार्गों के कारण वायु में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है। इसके अलावा कूड़ा-कचरा जलाने से एयर पॉल्यूशन होता है। इसके बाद उद्योगों की स्थापना और वाहनों के अत्यधिक प्रयोग के कारण पर्यावरण दूषित होता है।
बचने के लिए ट्रैफिक कम करना होगा
एनजीटी ने इन शहरों में वाहनों की आवाजाही सीमित करने को कहा है। इसके अलावा प्रदूषण फैलने की स्टडी रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं।
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Courtsey: Divya Himachal
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