परवाणू में लगेगी फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट

शिमला — एपीडा ने एचपीएमसी को 18 करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं। परवाणू में 10 करोड़ की रकम से अत्याधुनिक फल विधायन संयंत्र स्थापित होगा। वहीं शिमला के किंगल में आठ करोड़ की सहायता से सीए स्टोर व पैक हाउस स्थापित किए जा रहे हैं। एपीडा के सदस्य व कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह राठौर ने शिमला में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि यह सहायता सशर्त दी गई है। एचपीएमसी को हर साल निर्यात बढ़ाना होगा। एपीडा इसकी निगरानी भी रखेगी। उन्होंने कहा कि पहले आठ करोड़ की राशि मंजूर की गई थी, मगर उन्हें बागबानों के जो प्रस्ताव मिले, एचपीएमसी के आग्रह पर भी इस राशि को बोर्ड की बैठक में बढ़ाने का आग्रह किया गया। अब इसे 10 करोड़ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश में सेब रस की 10 हजार से 12 हजार तक मीट्रिक टन की डिमांड है, जबकि कुल उत्पादन छह हजार मीट्रिक टन के बराबर हो रहा है। इसमें हिमाचल का योगदान मात्र 750 से 800 मीट्रिक टन का ही है। जम्मू-कश्मीर 600 मीट्रिक टन उत्पादन कर रहा है, जबकि 3700 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादित किया जा रहा है। शेष खपत चीन द्वारा निर्यात से पूरी हो रही है। एपीडा का यह प्रयास है कि हिमाचल को अत्याधुनिक प्रोजेक्ट मुहैया करवाकर हर साल निर्यात को बढ़ावा मिल सके व इसमें देश आत्मनिर्भर भी बन सके। श्री राठौर ने कहा कि एपीडा के ताजा प्रयास से एक करोड़ 20 लाख डालर की बचत होगी, यदि देश भर के संयंत्रों को इस मुहिम के तहत समयबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाए। उन्होंने बताया कि किंगल में जो सीए स्टोर व पैक हाउस स्थापित किया जा रहा है।






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