केंद्रीय योजना ‘ई-नैम’ के नाम पर छह करोड़ की बंदरबांट का आरोप, योजना का मकसद अधूरा
शिमला— कांग्रेस सरकार के समय में हुए एक और घोटाले की परतें खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। वर्तमान सरकार ने पूर्व सरकार के कुछ मामलों में जांच चला रखी है, जिसके बाद अब एक और जांच बिठाई जा रही है। मंडियों को ऑनलाइन करने के लिए दिए गए छह करोड़ रुपए में गड़बड़झाले की आशंका जताई जा रही है, जिसे लेकर सरकार विभागीय जांच खोलेगी। इसके आदेश सरकार की तरफ से हो चुके हैं और जल्दी ही यह सामने आएगा कि पैसा किस काम के लिए दिया गया था और लगा कहां पर है। पूर्व सरकार के समय में हिमाचल सरकार इलेक्ट्र्रॉनिक नेशनल एग्रीक्लचर मार्केट (ई. नैम) के तहत यह पैसा दिया गया था, जिससे सभी मंडियों को ऑनलाइन किया जाना था। यह योजना इसलिए थी ताकि प्रदेश की सभी मंडियां राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ें और दिल्ली में भी पता हो कि हिमाचल की किस मंडी में किस फल या सब्जी का क्या मूल्य है। सभी स्थानों के रेट इस नेटवर्क से पता लग सकें, मगर वास्तव में ऐसा हुआ नहीं है। केंद्र सरकार ने नेशनल प्रोजेक्ट के तहत राज्य को छह करोड़ रुपए की राशि प्रदान की थी। केंद्र से मिली इस राशि को तय मानकों के मुताबिक खर्च किया गया है अथवा नहीं, कम्प्यूटरों के साथ-साथ सीसीटीवी की खरीद क्यों की गई, यह जांच का विषय होगा। साथ ही प्रोजेक्ट के तहत मंडियों में लगाए गए कर्मचारियों के मामले को भी देखा जएगा। विभागीय जांच अधिकारी देखेंगे कि प्रोजेक्ट के तहत भर्ती कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक रखा गया है अथवा सिर्फ चहेतों को ही रोजगार देने के मकसद से भर्ती की गई है। गौर हो कि मोदी सरकार ने साल 2016 में शुरू की ई-नैम योजना में हिमाचल को शामिल किया था, क्योंकि हिमाचल फल राज्य है। यहां से बड़े पैमाने पर विभिन्न फल देश की अलग-अलग मंडियों में भेजे जाते हैं, जिसमें विशेषकर सेब है। प्रदेश की 19 फल व सब्जी मंडियों को प्रोजेक्ट के तहत ऑनलाइन किया गया है। मंडियों को ऑनलाइन करने का मकसद किसानों व बागबानों को देश की तमाम मंडियों के भावों से अवगत करवाने का था। उन्हें उनके उत्पादों की उचित कीमत प्रदान करना इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य था। प्रदेश की सोलन मंडी को बीते सालों में ई. नैम के तहत बेहतर काम करने के लिए पुरस्कृत भी किया जा चुका है। ई-नैम के तहत देश की मंडियों से जुड़़ी प्रदेश की 19 मंडियों के अलावा विपणन बोर्ड की 22 और मंडियों को प्रोजेक्ट के तहत ऑनलाइन करने की योजना है। केंद्र से मिली इस राशि से न सिर्फ कम्प्यूटर खरीदे गए, बल्कि सीसीटीवी की खरीद भी हुई। साथ ही कई मंडियों में बहुतायत में युवकों को भर्ती भी किया गया। आरोप है कि ई-नैम के तहत केंद्र द्वारा तय मानकों के विपरीत प्रोजेक्ट के तहत मिली रकम को खर्च किया गया है। लिहाजा अब सरकार ने इसकी विभागीय जांच शुरू करने का फैसला लिया है।
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Courtsey: Divya Himachal
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