युवाओं को नशे के जाल से छुड़ाने में करें सहयोग

धर्मशाला— पंजाब में खतरे की हद को पार कर चुके ड्रग्स सेवन और इससे जुड़े कारोबार से प्रभावित हो रहे हिमाचल प्रदेश को इसके चंगुल से बचाने के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रदेश सरकार अब अलर्ट हो गई है। इसके चलते प्रदेश सरकार के तत्त्वावधान में ड्रग्स प्रभावित व्यक्तियों या नशेडि़यों के पुनर्वास हेतु निर्माण के लिए सिद्धबाड़ी स्थित क्षेत्रीय संसाधन प्रशिक्षण केंद्र-2 (आरआरटीसी-2) में मंत्रणा के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक हंस राज चौहान ने कहा कि राज्य में ड्रग्स प्रभावितों के पुनर्वास हेतु नीति निर्माण से पूर्व इससे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर समाज के सभी वर्गों को इसके लिए आयोजित व्यापक चर्चाओं में शामिल होना चाहिए। इससे प्रदेश में ड्रग्स प्रभावितों के पुनर्वास हेतु नीति निर्माण में सभी वर्गों के सुझावों को सम्मिलित करने में मदद मिलेगी। जिला विधिक सेवा की सचिव नेहा दहिया ने सुझाव दिया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में चलाए जाने वाले भांग उन्मूलन अभियान को मनरेगा में शामिल किया जाना चाहिए। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर डा. आलोक अग्रवाल ने कहा कि ड्रग्स सेवन तथा इसके कारोबार पर अंकुश लगाने हेतु ठोस कदम उठाने के लिए सभी विभागों को आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक वीके मोदगिल ने सभी संबंधित एनजीओ और पुनर्वास केंद्रों से आग्रह किया कि वे ड्रग्स एडिक्टस के इलाज में प्रशिक्षित चिकित्सकों की सहायता लें। इस अवसर पर क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला से डा. अनिता, टीएमसी के मनोचिकित्सक डा. मेजर सुखजोत, मुनीष शर्मा, डीएसपी सुरेंद्र शर्मा, नरेश रावत, अमर ज्योति कला मंच बिलासपुर की संचालक अमरावती, विवेक, दयानंद शर्मा और विशाल ने अपने विचार और अनुभव साझा किए।

कुल्लू की एसपी बोलीं

कुल्लू की एसपी शालिनी अग्रिहोत्री ने जिला में पिछले सात माह से चलाए जा रहे नशा उन्मूलन अभियान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह समस्या अवैध उत्पादन, अवैध कारोबार और ड्रग्स सेवन तक की ही सीमित नहीं है, क्योंकि इसे कुछ लोग सुनियोजित ढंग से चला रहे हैं। ये लोग युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। मलाणा घाटी के अलावा अन्य स्थानों पर भी इस इस धंधे में लोग संलिप्त हैं, जहां आम आदमी का पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी इस नशे के गिरफ्त में फंस रही हैं, लेकिन जो छूटना चाहती हैं, उनके लिए कोई भी पुनर्वास केंद्र राज्य में मौजूद नहीं है। अगर मांग नहीं होगी तो आपूर्ति अपने आप रुक जाएगी।

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Courtsey: Divya Himachal
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