Tuesday, April 4, 2017

अब मकान नही, सरकार गिरेगी

शिमला – उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति ने चेतावनी दी है कि अब लड़ाई बैठकों से नहीं जमीन पर खुले मैदान में लड़ी जाएगी। समिति ने सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपनी हठ का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार हो जाए। अब भवन नहीं सरकार गिरेगी। यह निर्णय जन कल्याण समिति की सोमवार को शिमला में आयोजित बैठक में लिया। बैठक में आंदोलन को व्यापक बनाने और अन्य जिलों में बढ़ाने पर भी सहमति जताई गई। समन्वय समिति के सचिव गोविंद चतरांटा ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 14,7700 मकान हैं, जिनमें से 13,11000 मकान ग्रामीण और 1,66000 मकान शहरी क्षेत्र में हैं और आने वाले वक्त में इन सभी मकानों को टीसीपी के दायरे में लाया जा सकता है। इसलिए अगर अभी इस पर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई तो प्रदेश के लाखों परिवारों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समिति इस मुद्दे को प्रदेश में उठाएगी और लोगों को लामबंद करेगी। समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्रपाल मेहता ने बताया कि वे एक महीने के अंदर मर्ज्ड एरिया के सभी वार्डों सहित शिमला ग्रामीण में बैठकें आयोजित करेंगे। उन्होंने भवन नियमितिकरण की प्रक्रिया में व्यापक भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई। हिमाचल किसान सभा के जिलाध्यक्ष सत्यवान पुंडीर ने सभी भवन मालिकों को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे पर उनका पूरा समर्थन करेंगे और पांच अप्रैल की रैली में भी इसे जोर-शोर से उठाया जाएगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से पांच  अप्रैल को रैली में भाग लेने का आह्वान किया, जिस पर सभी लोगों ने हामी भरी। उन्होंने  कहा की सरकार की बेरुखी के खिलाफ  व्यापक जनाक्रोश है, लेकिन इस जनाक्रोश को संगठित करके आंदोलन में बदलने की जरूरत है। वहीं शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेन्द्र मेहरा ने कहा कि सरकार गांव और शहर में वैध और अवैध का सवाल खड़ा करके गरीब और कमजोर तबके को परेशान कर रही है। गांव में जमीन से किसानों की बेदखली की जा रही है और शहरों में भी लोगों के आशियानों को उजाड़ने की कोशिश हो रही है। प्रो. विजय वीर सिंह डोगरा का मानना था कि हमें इस मुद्दे पर किरायेदारों को भी साथ लेना चाहिए क्योंकि इसका असर किराएदारों पर भी पड़ रहा है। बैठक में पूर्व पार्षद राजेंद्र जिंदा, रणवीर वर्मा, कृष्ण लाल, केएल चौहान ने भी अपने विचार रखे।

 


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source: DivyaHimachal

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