नैनाटिक्कर की औषधियां कैमरे में कैद


नैनाटिक्कर — हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड शिमला के सौजन्य से जैव विविधता रजिस्टर बनाने हेतु व्यावसायिक वैज्ञानिक डा. चंद्रकांत शर्मा तथा डा. दुष्यंत शर्मा इन दिनों नैनाटिक्कर पंचायत के दौरे पर हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत प्रधान तथा पंचायत सदस्यों के सहयोग से इस इलाके की जलवायु व यहां कुदरती तौर पर पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों, अन्य वनस्पतियों, जीव-जंतु आदि के बारे में जानकारी एकत्रित की। इसके उद्देश्य के बारे में जब डा. चंद्रकांत तथा डा. दुष्यंत से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सरकार की योजनानुसार अलग-अलग जगहों से जानकारी इकट्ठी की जा रही है कि किस इलाके में कौन सी जड़ी-बूटी या वनस्पति बहुतायत में पाई जाती है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग इनका किस तरह से इस्तेमाल करते हैं, ताकि इस इलाके की जड़ी-बूटियों का वैज्ञानिक तरीके से जनहित के लिए दोहन किया जा सके तथा इलाके के लोगों को उनका आर्थिक लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि उनका दूसरा लक्ष्य इन जड़ी-बूटियों द्वारा परंपरागत तरीके से कोई दवाई या अन्य प्रोसेसिंग करने वाले व्यक्ति को भी खोजना है, जिसकी प्रतिभा का इस्तेमाल इन जड़ी-बूटियों के परिशोधन के लिए पारंपरिक तौर पर किया जा सके। उन्होंने कहा कि नैनाटिक्कर निवासी महिपाल गर्ग से उनकी मुलाकात हुई है, जो कि स्थानीय जड़ी-बूटियों से परंपरागत तरीके से कुछ दवाइयां जैसे कि सौंफ, पुदीना, मकोच, अजवायन, गलोय का अर्क, गौमूत्र की भावनादिया हुआ त्रिफला व कई दर्द निवारक तेल आदि बनाते हैं, जिसको उन्होंने प्रोसेसिंग सहित अपने कैमरे में कैद कर लिया है। उन्होंने बताया कि महिपाल गर्ग तथा कई अन्य व्यक्तियों के सहयोग से उन्हें जानकारी मिली है कि इस इलाके में 150 के आसपास आयुर्वेदिक इस्तेमाल की वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनमें से काफी तो बहुतायत में होती हैं, जिनका व्यावसायिक तौर पर दोहन किया जा सकता है।







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